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शीर्षक -हमारे कर्म

N manglam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारे कर्म ही जीवन देते हैं।
        
                                                    
                            
पिछले जन्म के कर्म फल हैं।

मानव का जन्म हमने पाया है।
अच्छे और सच्चे कर्म करने हैं।

मोह माया के संसार आये हैं।
सांसों के साथ सब अपने हैं।

बस स्वार्थ फरेब हम रखते हैं।
नीरज हमारे कर्म सच लिखते हैं।

रिश्ते नाते सब सांसों के साथ हैं।
न हम तुम बस सांसों का खेल हैं।

हम न छल फरेब मन में रखते हैं।
मोक्ष की राह पर हम चलते हैं।

न संग लाए न कुछ लेकर जाना है।
हां सब मोह माया छोड़ कर जाना हैं।

हम सभी सब जानते और समझते हैं।
न जाने गलत कर्म हम कर जाते हैं।

पूजा पाठ रमायण गीता उपदेश हैं।
हमें आचरणों को सहयोग करना हैं।

कर्म फल व्यवस्था कुदरत देती हैं।
आज न तो समय के साथ मिलतीं हैं।
 
5 दिन पहले
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Deepak Sharma

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