विज्ञापन

साधु रे!

Mukesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भजन
        
                                                    
                            
जगत में कौन भला रे!साधु,
जगत में कौन भला,
जिस पर आई नहीं रे कोई बला,
जगत में वही भला रे!साधु2

जो सद्कर्मों की खेती करता,
मोह माया को झोली में भरता,
जो अपनों के हित नीत है मरता,
जो है स्वजनों का कर्ता-धर्ता,
जगत में वही भला रे!साधु2..

जो गो माता की सेवा करता,
दुखी जनों का दुख है हरता,
जन-जन में खुशियां है भरता,
जो जीव मात्र का पालन करता,
जगत में वही भला रे! साधु2 ...

जो साधु संतों की सेवा करते ,
जो जीवो के हित पानी भरते,
जो मधुर वाणी में मन को हरते,
जो सुबह शाम है भजन करते,
जगत में वही भला रे!साधु२...

जो गुरुवर बनकर राह दिखाता,
जो ज्ञानी बनकर ज्ञान बताता,
जो रूठे हुए को सहज मनाता,
जो मानव,मानवता दिखलाता,
जगत में वही भला रे !साधु२..

जगत में कौन भला रे साधु,जगत में कौन भला,
जिस पर आई नहीं रे,कोई बला,जगत में वही भला रे साधु ..
- मुकेश कुमावत मंगल 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all