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यहाँ शाम उतरती तो

Mohit Poonam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यहाँ शाम उतरती तो है,
        
                                                    
                            
पर उसमें मेरे शहर की खुशबू नहीं होती।

सूरज यहाँ भी ढलता है,
मगर उस डूबते सूरज में
अपने देश की मिट्टी का रंग नहीं होता।

यहाँ सब कुछ है..
ऊँची इमारतें, चमकती सड़कें,
सुविधाओं का संसार...
बस नहीं है
अपने लोगों की आवाज़,
अपने शहर की साँस,
अपने वतन की शाम।

कभी-कभी लगता है,
विदेश की सबसे बड़ी तन्हाई
रात नहीं होती,
बल्कि वह शाम होती है
जो हर दिन यह याद दिलाती है
कि मेरा दिल आज भी
अपने भारत की गलियों में ही धड़कता है।

क्योंकि सच यही है..
विदेश की हर शाम खूबसूरत हो सकती है,
लेकिन मेरे देश की एक साधारण-सी शाम के सामने
उसकी सारी चमक फीकी पड़ जाती है।
2 महीने पहले
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