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“अब लौटना मत”

MOHIT GOSWAMI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैंने ख़ुद को तुमसे यूँ नज़रअंदाज़ होते महसूस किया है,
        
                                                    
                            
तुम्हें गैरों के साथ मुस्कुराते देखा है,
उनकी बातों में खिलते,
उनके साथ बेझिझक शरमाते देखा है…

और फिर कुछ ही लम्हों बाद,
तुम्हारी आवाज़ में छुपी वो बनावटी उदासी
मुझे ही पुकारने लगी…

पर अब लौटना मत—
तुम उन्हीं की रहो,
जिनके साथ तुम सच में हँसती हो,
जिनके साथ तुम्हारी आँखें यूँ ही चमक उठती हैं,
जिनके सामने तुम बिना झिझक शरमा जाती हो…

अभी तो बस दिखावे की चमक है तुम्हारी आँखों में,
जब वो लोग अपना असली रंग दिखाएँगे,
तब शायद तुम मेरा ही पता पूछोगी…

पर शायद उस वक़्त—
तुम चाहकर भी
मुझे फिर कभी पा न सकोगी।
3 महीने पहले
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