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शीर्षक: "किताब का आखिरी पन्ना"

Minakshi sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक कहानी जो शुरू तो हुई, पर अंजाम तक न जा सकी,
        
                                                    
                            
दो दिलों की धड़कन थी जो, ज़माने को न भा सकी।
हम दोनों ने मिलकर लिखे थे जो हसीन ख़्वाब,
वो महज़ एक कोरे कागज़ की दास्तान बनकर रह गए।
तुम आज भी शामिल हो मेरी हर दुआ के हर लफ़्ज़ में,
मगर तक़दीर के पन्नों पर हम कभी एक न हो सके।
मोहब्बत तो पूरी थी हमारी,
इसमें कोई शक नहीं,
बस उस अधूरी किताब का आखिरी पन्ना हम लिख न सके।
1 सप्ताह पहले
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