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पोखर(खोय)

Meera patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मानव रूपी वृक्ष में पोखर कई है
        
                                                    
                            
हर पोखर में जीव जन्तु कोई खाली नही है
क्रोध नाम की पोखर में तीर तलबार भाला
ये शब्दों के खंजर शब्दों से मार डाला
प्रेम नाम की पोखर विध्वंश रोकती
टूटे शीशे को फिरसे जोड़ती
इसमें तस्वीर मां की
जो रचना सृष्टि की कर डालती
एक पोखर झिलमिल करती
चारों ओर उजियारा
इसमें मेरा राम बैठा
जो तन मन धन सारा
3 महीने पहले
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