विज्ञापन

पागलों की तरह साथ रहते थे ....

Medha Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहले हम आदिमानव थे
        
                                                    
                            
सामने वाले को भी आदिमानव ही मानते थे
तब हम नहीं पहचानते थे
क्योंकि हम असभ्य थे
फिर सभ्यताएं बढ़ी
हम इंसान हुए
और पहचानने लगे ..
हिंदू ,मुसलमान , सिक्ख और इसाई
नहीं थे तब हम सभ्य
क्योंकि तब विद्यालय नहीं थे
शायद इसलिए तब वाले
नहीं सीख पाए थे जाति धर्म की राजनीति
तब हम पत्ते लपेटते थे
क्योंकि नहीं बने थे तब कपड़े
इसीलिए शायद तब
नहीं उतारे जाते थे स्त्रियों के कपड़े
तब नहीं बने थे ऐसे अस्पताल
जहां हो सके इलाज मानसिक स्थिति का
इसीलिए शायद हम बिना लड़े
पागलों की तरह साथ रहते थे ....
3 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile