विज्ञापन

रंगीन जुराबें मेरी

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ी स्याह सी है सड़क ये
        
                                                    
                            
चलो इस पर थोड़ा रंग बिखरा दें
इन मायूस मिल के पत्थरों पर
चलो थोड़ी हँसी बना दें
बेरंग से इस माहौल में
मेरी रंगीन जुराबों से कोई गीत गँवा दें
आती रहेंगी जब आनी होंगी मंज़िलें हमारी
तब तक इस सफ़र को ख़ुशी ऊढ़ा दें
6 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

444 कविताएं

View Profile