विज्ञापन

क्यों कोसें आज को

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्यों रोज़ को रोज़ बदलने का मंसूबा करें
        
                                                    
                            
ज़ो आज है वो सुधार बेशक जाये पर सूरते हाल क्या इतना ख़राब है
की रोज़ उसे कोसा करें
जिन्हें अपना आज इस क़दर ना मंज़ूर है
पूछो इनसे ज़िंदगी कल होगी और कमाल होगी ये कैसे इत्मीनान करें
बदलो बेशक पूरी शिद्दत से आपने आज को
पर जरा मुस्कुराओ यार जो ना रहें कल तो ना हँसे ना ये मलाल रहे
5 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

437 कविताएं

View Profile

malti gupta

16 कविताएं

View Profile