विज्ञापन

कुछ तो बात रही होगी

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ तो बात रही होगी
        
                                                    
                            
ज़िंदगी के रूठे रहने की आख़िर कुछ तो वजह रही होगी
मुमकिन हैं जीने के दस्तूर की समझ हमें ही कम रही होगी
या उन महलों में जो उसको पसंद हो कुछ ऐसी बात रही होगी
वरना यूँ ही तो कोई रूठ नहीं जाता
कोई तो खता हुई होगी
तभी खुशनुमा ज़िंदगी के किस्सों में हमारा ज़िक्र नहीं आता
सबके पतों पर पहुँच जाती है हँसी बस उसे एक हमारा ही घर नज़र नहीं आता
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile