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हज़ारों मिल रहे हैं झुंड में मुँह मोड़ने वाले।

Master Abhay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कसम खाकर भी झूठे हैं यह दिल तोड़ने वाले
        
                                                    
                            
यह लोग हैं बहाने से छोड़ने वाले।

बदनाम कर रखा है यूं ही मोहब्बत को
यह मोहब्बत नहीं करते जिस्मों को चाहने वाल l

वफ़ा की आड़ लेकर साफ़ वादे मोड़ने वाले,
कहाँ मिलते हैं अब रूहों से रिश्ता जोड़ने वाले।

ज़रा-सी बात पर हर बार किस्सा ख़त्म करते हैं,
बहाने ढूँढ ही लेते हैं दामन छोड़ने वाले।

मोहब्बत नाम है बस, चाह तो जिस्मों की है इनको,
ये ख़्वाहिश के परिंदे हैं हवस में दौड़ने वाले।

सजाया था जिन्हें पलकों पे अपने ख़्वाब के जैसा,
वही निकले हमारे आइने को फोड़ने वाले।

तिजारत बन गई है आजकल पाकीज़ा चाहत भी,
बहुत हैं नाम पर उल्फ़त के दिल को तोड़ने वाले।

भरोसा अब करें किस पर यहाँ हर शख़्स नक़ली है,
हज़ारों मिल रहे हैं झुंड में मुँह मोड़ने वाले।
4 दिन पहले
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