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प्रकृति की गोद में

Manshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब सूरज की पहली किरण धरती पर पड़ती है,
        
                                                    
                            
तो मानो जैसे सारी प्रकृति झूम उठती है ॥

हर सुबह की पहली किरण यही कहती है,
उठो आज फिर से एक नया दिन आया है ॥

वृक्ष लहलहा रहे हैं, पक्षी चहक रहे हैं,
कोयले मधुर वाणी में गा रही है,
हवाएं जैसे कुछ कह रही हो,
और नदियों की लहरें जैसे कोई दुआ दे रही हो ॥

जब बादल बरसते हैं धरती पर,
तब मिट्टी से भी खुशबू में राग उठता है ॥

तितली उड़ रही है, फूलों की खुशबू में,
मोर नाच रहे हैं, जैसे मानो कि
प्रकृति खुद उत्सव मना रही है ॥

ना कोई शोर, ना कोई दिखावा,
सिर्फ सुकून और प्यार ही प्यार है ॥
प्रकृति हमें बस यही सिखाती है,
जड़ें गहरी रखो, आंधियां आकर चली जाएंगी ॥
 
3 महीने पहले
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