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बचपन का प्यार दिल से भुलाया..

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बचपन का प्यार दिल से भुलाया नहीं गया,
        
                                                    
                            
वो ख़्वाब उम्र भर दिल से मिटाया नहीं गया।।

मिट्टी की खुशबुओं में जो एहसास बस गया ,
कभी भी उसे दिल से बाहर बहाया नहीं गया।।

वो काग़ज़ों की नाव, वो गलियों की दौड़ भी,
यादों का वो नगर कभी ढहाया नहीं गया।।

नज़रों ने पहली बार जो सीखा था इश्क़ तब,
उस सबक़ को वक़्त संग मिटाया नहीं गया।।

दुनिया ने लाख रिश्तों के मेले सजा दिए,
बचपन सा कोई रिश्ता निभाया नहीं गया।।

मिल भी गए मुझे हज़ारों नए लोग राह में,
उस नाम सा कोई भी कभी बुलाया नहीं गया।।

ताउम्र मेरे दिल के कोने में महफ़ूज़ है वही,
जिस प्यार को कभी भी जताया नहीं गया।।

कवि एमके सिंह ' यही दौलत है ज़िंदगी की,
बचपन का प्यार फिर कभी पाया नहीं गया।।

 
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