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कोई तो आयेगा इस तूफां में, साहिल बनकर!!

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलते चलते राह में एक पत्थर का टुकड़ा आया,
        
                                                    
                            
मैंने ठोकर मार दिया तुम्हारा दिल समझकर!!

वो बेरूखी नहीं ,तुम्हारी बेरहमी की इंतेहा थी,
क्यूँ ऐसे ठुकरा दिया, हमें कातिल समझकर!!

हम दोनों एक ही नदी के किनारे बनकर रहे
पास रहे पर, मिल न सके, "समदिल" बनकर!!

कौन कहता है कि ये रिश्ता अब टूट ही गया,
सच है कि कभी जुड़ा नहीं, मंजिल बनकर!!

तुम चले गये तो अब नया सफर शुरू हुआ है,
कोई तो आयेगा इस तूफां में, साहिल बनकर!!
2 सप्ताह पहले
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Rabindra Aman

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