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अपने हिस्से का प्यार मांगूं

Manoj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना कोई उपहार माँगूँ
        
                                                    
                            
ना कोई करार माँगूँ
भैया मैं तो सिर्फ तुमसे
अपने हिस्से का प्यार माँगूँ!

थाली में जो सजी हुई है
अक्षत, रोली, पुष्प , दीप
सबमें मेरे सपने हैं, कि
बनो सदा आकाश प्रदीप
जितनी पीड़ा है तुम्हारी
थोड़ा सा उधार मांगूं!
भैया मैं तो सिर्फ तुमसे
अपने हिस्से का प्यार मांगूं!

जब जब तुम्हारी आंखों में
बहारों का चमन चमके
तब तब मेरे अधरों पर
पुष्प खिले, उपवन महके
चांद, सितारों से भी बड़ा हो
भैया का संसार मांगूं!
भैया मैं तो सिर्फ तुमसे
अपने हिस्से का प्यार मांगूं!

दूर रहूँ गर मैं तुमसे
एक दिन पास चले आना
मेरी खुशी के लिए भैया
खुशियाँ अपनी संग ले आना
इतना तो हकदार हूँ
कर करके मनुहार मांगूं!
भैया मैं तो सिर्फ तुमसे
अपने हिस्से का प्यार मांगूं!

ये जो कच्चा धागा है
रेशे रेशे में अमृत है
हरेक रंग में स्नेह भरा है
हरेक बंध में प्रीत है
तुम निभाना मैं निभाऊं
ईश्वर से दुलार मांगूं!
भैया मैं तो सिर्फ तुमसे
अपने हिस्से का प्यार मांगूं!!
एक महीने पहले
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