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काला काला सा धुआँ

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यहाँ वहाँ हर जगह
        
                                                    
                            
देखता हूँ जहाँ जहाँ
हर तरफ फैल रहा
काला काला सा धुआँ

साँसें हैं सिसक रहीं
सिहर रहा रूआँ रूआँ
जीने को विवश जीवन
पीछे खाई आगे कुआँ।
-मं शर्मा 
एक महीने पहले
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