रिश्ते कुछ कमाए थे
कुछ जन्म से पाए थे
सब साथ साथ चले
रखे ना कोई गिले
कुछ हाथ छूट गए
कुछ साथ छोड़ गए
फर्ज़ सब निभ गए
कर्ज़ सब चुक गए
उम्र थी घटती रही
अकेलेपन बढ़ते रहे
खुद को भी एकदिन
बीच राह छोड़ चले।
-मं शर्मा