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आद्यांत

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भावनाएँ जीवंत थीं
        
                                                    
                            
ह्रदय मगर क्लांत था
वसंत तो अनंत थे
आकांक्षाओं का अंत था

सुख सुविधाएँ पर्यंत थीं
असंतोष आद्यान्त था
सब होकर कुछ न होने का
जीवन का षडयंत्र था ।
-मं शर्मा 
एक महीने पहले
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