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आसमाँ में उड़ना चाहता हूँ

Maneesh Tiwaree

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर ली बहुत गुस्ताखियाँ
        
                                                    
                            
ज़मीं पर,
बेपरवाह आसमाँ में
उड़ना चाहता हूँ।

भीड़ में हो गई काफ़ी
भागम-भाग,
अब खुद में कुछ वक़्त
ठहरना चाहता हूँ।

करके देख लिया
दुनिया से खूब तकरार,
अब शांति से दो पल
बैठना चाहता हूँ।

जवानी हसरतों को
पूरा करने में गुजरती जा रही है,
बचपन को अपने
मैं फिर से जीना चाहता हूँ।

दिन की चकाचौंध से
रोज़ रूबरू होना होता है,
आज रात के अँधेरे में
खुद को ढूँढना चाहता हूँ।

मन बावरा है,
कहकर संभाल लेता हूँ होश को,
इस बार बदहोशी में
खुद को देखना चाहता हूँ।

जागना अच्छा लगता है
दिल-ए-गुलज़ार में,
नींद में भी
खुद से मिलना चाहता हूँ।
1 सप्ताह पहले
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