विज्ञापन

सुहाना वह सफर होगा

Mahesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुहाना वो सफर होगा
        
                                                    
                            

सुहाना वह सफर होगा, सुहानी रात भी होगी।
तलब उठे सीने में, मधुर मुलाकात भी होगी।

खुदी को कर बुलंद इतना खुदा भी आ के बोलेगा,
मिले मंजिल वह तुझको, कभी सौगात भी होगी।

लगे न आग सीने में, ना मुश्किल हो जीने में,
पीकर जाम मोहब्बत का मधुर शुरुआत भी होगी।

लगाया बीज मोहब्बत से कल मिट्टी बाहर आएगा,
उसी की छांव में कल तक नस्ल-ए-राहत भी होगी।

हजारों ठोकरें खाकर मंजिल पास आती हैं,
मेरे इरादों के मंजिल की कभी हिफाजत भी होगी।

झुकी पलकें बयां करें, रुकी धड़कन जुबां बन जाए,
निगाहों की इबादत से हसीं सौगात भी होगी।

न कोई चांद से रिश्ता है,ना तारों से शिकायत अब,
मेरी मंजिल, मेरी जन्नत, मेरी कायनात भी होगी।

मिलेंगे यार वह मुझसे कभी शोला बरसते थे,
तिरी मोहब्बत के दर पर सुहानी बात भी होगी।

तिरे कूंचे की खामोशी ग़ज़ल बनकर पुकारे जब,
मेरे मुस्कुराते नयनों से कभी बरसात भी होगी।

'महेश' अब और क्या मांगे दुआ बस इतनी मांगे वो,
तिरी रहमत जो मिल जाए,तो हर इक बात भी होगी।
-महेश तंवर
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile