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मैं सीख गया।

LS Kuntal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोयल की कुहू - कुहू सुन।
        
                                                    
                            
पपीहे की पिहू - पिहू सुन।
सुन मधुर गीत चिड़ियों के,
भंवरे की सुन गुन - गुन।
मधुर गीत उनके संग, मैं गाना सीख गया।।
देखा हँसती कलियों को।
उन सेमों की फलियों को।
हँसते देखा फूलों को,
उनसे हँसती गलियों को।
तबसे मधुर हँसी में, मैं हँसना सीख गया।।
देखा सरिता को बहते।
हर पल आगे ही बढ़ते।
बढ़ लो तुम मार्ग मिलेगा,
निर्झर को ऐसा कहते।
तबसे कठिनाई में भी, मैं बढ़ना सीख गया।।
देखा उड़ते बादल को।
उड़ते देखा खगदल को।
पवनों संग उड़ते भू के,
इस हरियाले आँचल को।
तब कविता में, भावों में, मैं उड़ना सीख गया।।
एक महीने पहले
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