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मैं लवकुश सरल स्वाभिमानी

Lavkush Awasthi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं लवकुश सरल स्वाभिमानी
        
                                                    
                            
शब्दों का जादूगर, कविता का दीवानी।
श्रृंगार में मधुरता, वीर में तूफानी,
मैं लवकुश, सरल स्वाभिमानी।
भावों से खेलूं, शब्दों को साधूं,
हर पंक्ति में जीवन का रंग डालूं।
मंच पर गूंजे मेरे स्वर का तराना,
दिल छू ले हर श्रोता का अफसाना।
श्रृंगार में प्रेम की मिठास लिए,
वीर रस में साहस का एहसास दिए।
मैं शब्दों से खींचूं मन के चित्र,
हर कविता में हो नई उमंग का चित्र।
साधारण हूँ, पर सपने हैं बड़े,
कविता के संग चलूँ हर मोड़ पर खड़े।
मैं लवकुश, शब्दों का बुनकर,
काव्य से रचूँ जीवन का सुंदर सफर।
2 सप्ताह पहले
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