विज्ञापन

आज आप से काम है।

Lalit Dadhich

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब भी वक्त है जनाब हिसाब कीजिए,
        
                                                    
                            
हम हमारे कुछ नहीं लगते इसलिए आप नक़ाब कीजिए।

हमने ही लूटा है खुद को जाहिल सी तहकीकात कीजिए,
हमने जन्नत शब्द को लिख के उसे देख लिया है,
आप हकीकत हमें थोड़ा नजरंदाज कीजिए,

छूट गए हैं हम जो बचें हैं हम उस पर ध्यान दीजिए,
रस्ते भी मोड़ नहीं बनाते हमारे, हमारी गली से गुजर कर ये पर्दे भी साफ कीजिए,

नसीहत दे रहे हैं आपको हमारा भी नसीब से मिलान कीजिए,
जो दिख जाएं हमारी मोहब्बत, तिनके के कोने की नोक
पर अगर कोई छाया,
वहां ग़म से बचाने को पहरेदारी कीजिए,

इतनी सी जगह मिली हमें जिंदगी में,
बस गए कैसे ना जाने,
अब गिरते ही रहें ऐसी अगाध खाईं कीजिए,

हम तो बचने आए ही नहीं है,
अगर गलती से हम अथाह बेसहारा को मौत मिल जाए,
हमारे लिए आप मौत का इंतजार कीजिए,

हमने तो ख़ुदा की अनंत आँख मिचौली में,
सारा कतरा कतरा देखना शुरू किया,
हमारा ही कतरा कहीं मिल जाए तो धूल समझकर आप साफ कीजिए,

इतना काम करने से मना कर दे तो,
हमें माफ कीजिए, आप भी शब्दों के जाल दीजिए,

कहीं भी कभी भी थक गए तो कहीं पे भी आराम कीजिए,
ज़ख्म को उधार रखकर दवा का इंतजाम कीजिए,

खुद से ही अनजान हैं हम,
बस हमारा नाम लीजिए।।"
- ललित दाधीच
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all