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"मेटा वाले जिन्न की लीला "

Lakshman Jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एआई आया, वरदान लाया, अद्भुत चमत्कार है,
        
                                                    
                            
पल में लिख दे कविता, भाषा का कलाकार है।

बूढ़ा भी जवान लगे, ऐसा फ़िल्टर डालता,
रूप-रंग बदले पल में, सबको खूब छलता है।

मेटा बना है जिन्न अब, कहो तो हाज़िर है,
जो भी मन में सोचो, सब कुछ तो हाज़िर है।

भोला-मीठा जिन्न बोले, “मैं हाज़िर हो जाऊँगा,
ज़्यादा मत घिसो मुझको, वरना बेकार बन जाऊँगा।”

लेखक-कवि सब खुश हैं, भूल सुधर जाती है,
पर अक्ल अपनी सारी, धीरे-धीरे जाती है।

चेहरा चमका लो भले, मेटा से सँवार कर,
मिलना गली में यारों से, असली रूप निखार कर।

असली रूप जो देखा, दोस्ती बिखर जाएगी,
फ़ोटो वाली यारी तो, पल में उतर जाएगी।
 
6 दिन पहले
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