विज्ञापन

जिन्होंने हमें जिन्दगी दिया

Kuldeep Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पितृपक्ष में पितरों के लिए,
        
                                                    
                            
तमाम तरह के अनुष्ठान,
तर्पण श्राद्ध गयाभोज जैसे,
अनेक धार्मिक अनुष्ठानों से,
उनकी आत्मशांति हेतु ,
जगह जगह आयोजन,
आयोजित किए जाते हैं।
सोचने वाली बात है,
जिन्दा पितरों की बात करें,
बहुत से लोग मुंह फेर लेते हैं,
ना उनके लिए सम्मान है,
ना ही बात करने का समय,
और हां सवाल जवाब अलग से,
काश ! हम समझ सकते,
जिन्होंने हमें जिन्दगी दिया,
उनके लिए जीवन का ,
कुछ समय निकालकर,
सुख दुःख में सहारा बनते।
सुख दुःख में सहारा बनते।।
-कुलदीप शुक्ला
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10845 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7356 कविताएं

View Profile