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कल हमारी यादें होंगी

Kuldeep Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज हम हैं,
        
                                                    
                            
कल हमारी यादें होंगी,
भूली बिसरी चर्चाओं में,
अनकही बातें होंगी।
समय के साथ,
तस्वीर कबाड़ में होगी,
हम अच्छे थे या बुरे,
कहने वाले भी नहीं होंगे।
जिन्दगी जीना चाहते थे,
प्रारब्ध कहें या ग्रहों की चाल,
समय के साथ सब,
हउच-पउच होता रहा।
ना खुलकर हंसी आई,
ना चिल्लाते हुए रोए,
प्रेम नफरत में फंसे रहे,
श्रद्धा भक्ति व विश्वास से,
वैराग्य भी नहीं ला पाए।
वैराग्य भी नहीं ला पाए।।
-कुलदीप शुक्ला
एक महीने पहले
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