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स्वीकार करो हे मातरम्

krishna murari

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                            सुजलाम्,सुफलाम् हे मातरम्,
        
                                                    
                            
स्वीकार करो मेरा परणाम।
मातरम्! शस्यश्यामलां, मातरम् ,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।१।।

उत्तुंग हिमाचल तेरा भाल-किरीट,
गंग-यमुन जल है ज्ञान की पीठ।
सिन्धु पखारे तेरा पांव, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।२।।

भूगोल तुम्हारा दर्पण है,
इतिहास तुम्हारा दर्शन है।
है भरा समीर सा सदा ज्ञान, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।३।।

आंचल तेरा झलमल -झलमल,
हैं वन उपवन और नील कमल।
संतति तेरे किसान, विज्ञान,जवान, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।४।।

जहां धर्म सनातन सतत् पले,
सब धर्मों को लगा के गले।
जहां विराजे शिव,राम, श्याम, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।५।।

बद्री, केदार, द्वारिका, रामेश्वरम,
व जग के नाथ, जगन्नाथ पुरम्।
हैं तेरे ए अतुल्य शुचिर धाम, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।६।।

विविध धर्म भाषा है अनेक,
यह श्रेष्ठ समुच्चय सुन्दर देश।
हैं तेरे सब विविध आयाम, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।७।।

आगम,निगम, भागवत, गीता,
हैं महाग्रंथ जग श्रेष्ठ पुनीता।
जहां सत्य-अहिंसा है कर्म प्रधान, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।८।।

जड़ -चेतन, नग, नाद,नीर्झर अंबु,
द्रष्ट -अद्रष्ट, चल -अचल विश्व शंभू।
हैं सभी तुम्हीं में निभय धाम, मातरम्,
स्वीकार करो मेरा परणाम।।९।।

सर्वे भवन्तु सुखिन:, मातरम्,
सर्वे सन्तु निरामया:, मातरम्।
जीवेम शरद: शतम्, मातरम्,
सब तेरे हैं संचित पयाम।
स्वीकार करो मेरा परणाम।।१०।।

धर्मो रक्षति रक्षत:हे मातरम्,
अतिथि देवो भव:हे मातरम्।
वसुधैव कुटुम्बकम् हे मातरम्,
तुम सबका रखतीं मान, हे मातरम्।
स्वीकार करो मेरा परणाम।।११।।
-कृष्ण मुरारी पाण्डेय
 
2 महीने पहले
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