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उस डायरी में

Komal Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अलमारी में रखी उस डायरी में,
        
                                                    
                            
उसमें लिखी एक शायरी में,
महक गुलाब की आज भी ज़िंदा है।
वो पत्तियां अब सूख गईं,
ख़्वाहिशें भी रूठ गईं
,मेरी वफ़ा पे तेरी बेवफ़ाई शर्मिंदा है!
एक महीने पहले
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