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जीवन सांझ की ओर

Komal Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवन सांझ की ओर है।
        
                                                    
                            
बीत गए मौसम सुनहरे, अब पतझड़ का दौर है,
ढल गया सुबह का सूरज, जीवन सांझ की ओर है।
जलता दिया बुझाया सबने, छाया अंधेरा घनघोर है,
उड़ती थी जो पतंग हवा में,
कट गई उसकी डोर है।
छूटना सब कुछ यहीं पर,
फिर भी पाने की होड़ है,
थक कर ठहरा राही अब तो,
आया अंतिम मोड़ है।
स्वीकार कर इस सत्य को तू,
किस बात पर इतना शोर है,
तूने भरपूर जिया है जीवन,
अब मृत्यु पर किसका जोर है।
एक महीने पहले
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