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भारत की निशानियाँ-

Kiran Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसे ही ना जग में अब तक बनी हैं स्वर्णिम कहानियाँ
        
                                                    
                            
भारत माँ के सपूतों ने खपाई अपनी जवानियां

तब जाकर के मिली आजादी जिस पर हम इतरा रहे
आओ मिलकर इसे सम्भालें भारत की ये निशानियां

जाने कितने शहीद हुए जिनकी न कोई गाथा है
आगे पीछे कोई नहीं था पड़ी हुई हैं विरानियां

हुई मांओं की गोदी सूनी कई सुहागन बेवा हुईं
तब अंग्रेजी जंजीरों से मिली हमें आजादियां

अब फर्ज हमारा है इसकी प्राणों जैसी रक्षा करें
पंद्रह अगस्त के स्वागत में दिखाए नहीं नादानियां।
-किरण मिश्रा 
2 महीने पहले
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