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झमाझम वर्षा

कौशलेंद्र

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब की वारिश
        
                                                    
                            
झमाझम बरसीं
पोर्नगालियाँ
नरों के मुख से
उससे भी अधिक
नारियों के मुख से
महामानव धन्य हुये
देश धन्य हुआ
सभ्यता धन्य हुयी
संस्कृति धन्य हुयी
भीगकर
गालियों की बरसात में।
अन्याय भी धन्य हुआ
जानकर
कि क्षमा कर दिया है
नानबायोलाॅजिकल भगवान ने
सभी गालीबाजों को
और लग जाना चाहते हैं उन सबके गले
हँसते हुये
किंतु...
छोड़ देना चाहते हैं
गोलियाँ खाने के लिए
राष्ट्रप्रेम के सच्चे दीवानों को
स्वतंत्र कर देना चाहते हैं
असुरों को
मारने के लिए पत्थर
हर उस व्यक्ति को
जो करेगा देश की
सच्ची सेवा
और न्याय की माँग।

अब की वारिश
उमस
ताप देने लगी है
ज्वालामुखी के
बहते लावे की तरह।
2 महीने पहले
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