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कहाँ खो गई वो सुबह?

karuna dixit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहाँ गई वो कोयल की कुंज?
        
                                                    
                            
कहाँ गई वो पपीहे की गूँज?
कहाँ गई वो सुबह की ठंडी पवन,
जिसमें घूमा करते थे इंसान होके मगन?
वो बारिश की बूँदों में नाचते मोर,
जो चारों तरफ़ करते थे मधुर शोर।
वो कबूतरों का प्यारा सा जोड़ा,
जिससे भर जाता था घर का चबूतरा।
अब बची है तो सिर्फ़ गाड़ियों की आवाज़,
सब भाग रहे पूरे करने अपने कामकाज।
इंसानों के पास अब न कोई वक़्त है,
सचमुच, आज की दुनिया कितनी सख़्त है!
3 महीने पहले
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