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सागर लहरें चांद सितारे

कमलेश कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सागर लहरें चाॅंद सितारे,
        
                                                    
                            
मन के मीत बना लेना ।
बिन मेरे 'तन्हा' तुम भी,
इक गीत प्रेम का गा लेना ।
सागर ------------------

आसमान में जब भी कोई,
घटा घुमड़ कर आ जाए ।
तुमको शायद रंग रूप कुछ,
उसका भी तो भा जाए ।
रिमझिम बूंदें जब गिरती हों,
मन को खूब भिगा लेना ।
सागर लहरें चाॅंद सितारे,
मन के मीत बना लेना ।।

बागों में कोयल बोलेगी,
मोर भी छम-छम नाचेंगे ।
प्रेम की पाती पवन लाएगी,
जिसको खंजन वाॅंचेंगे ।
रूठे हैं प्रियतम क्या तुझसे,
जाकर उन्हें मना लेना ।
सागर लहरें चाॅंद सितारे,
मन के मीत बना लेना ।।

रजनी रोज दुलार भरे,
बसुधा को मोती देती है ।
स्वच्छ चांदनी जब भी फैले ,
ताप सदा हर लेती है ।
जीवन की रुपहली यादें,
सोच सोच इठला लेना ।।
सागर लहरें चाॅंद सितारे,
मन के मीत बना लेना ।।
 
एक महीने पहले
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