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स्वयं को बदलना

kamal jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं संसार बदलना चाहता हूँ,
        
                                                    
                            
अपने भीतर झाँकने से बचता हूँ।
दूसरों की कमियाँ गिनता हूँ,
अपने अहंकार को ढकता हूँ।

धन का अंबार चाहता हूँ,
संतोष करना भूल जाता हूँ।
ज्ञान का सागर चाहता हूँ,
पूर्वाग्रहों को नहीं हटता हूँ।

औरों को उपदेश देता हूँ,
खुद पर उसे आज़माता नहीं।
दुनिया को आईना दिखाता हूँ,
अपना चेहरा देख पाता नहीं।

दुनिया में उजियारा खोजूँ,
अपने भीतर दीप बुझाता हूँ।
चाहता हूँ सब बदल जाएँ,
पर खुद बदलना भूल जाता हूँ।

— कमल किशोर झा 
2 सप्ताह पहले
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