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बिन साजन के

Jeewan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिन पायल मैं बिन कंगन के
        
                                                    
                            
है घर सुना बिन साजन के
हरदम रहते हैं नयनन में
झूठे किस्से है दरपन के
पढ़ रही धूप ऐसे चितवन पर
चल रही छाया आगे कदम के
फिर यकीन बैठा है बन ठन के
जातक सा मन पार गगन के

 
एक महीने पहले
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