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ग़ज़ल - "सोच"

Jayshankar Singh Baghel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सोचना ये सोचना क्या, सोच कर फिर सोचना।
        
                                                    
                            
जो न सोचा, वो भी सोचो, और क्या क्या सोचना।।

सोचा तूने अब तलक जो, झूठ, सच या जो भी हो,,,,
झूठ भी कुछ सोचना, और सत्य भी कुछ सोचना।

सोचना कि सोच कैसी, सोच अच्छी या बुरी,,,
यदि बुरी तो क्यूँ बुरी है, गूढ़ कर के सोचना।

सोचना कि सोच को, हम मार्गदर्शित कैसे करें,,,,
एकांत में, एकाग्र हो के, बैठ कर फिर सोचना।।

सोचना कि "जय" सही या सोच तेरी है सही,,,,
यदि नहीं, उत्थान कर फिर, मूलाधारित सोचना।

- जयशंकर सिंह बाघेल
("बस इतना-सा ख्वाब")  
2 महीने पहले
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