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ग़ज़ल -"आजाद हो गए"

Jayshankar Singh Baghel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम मुहब्बत में हमसे आजाद हो गए।
        
                                                    
                            
खुश होगे बहुत, हम बरबाद हो गए।।

मयखाने में जैसे हुआ जिक्र तेरा,,,,
हजारों रुपये यूँ खराब हो गये।

जिंदगी ने सिखाया, हरेक मोड़ पे जो,,,,
वो सारे सबक हमको याद हो गए।

गुलदस्ता दिया था जो पहली दफा तू,,,
वो सूखे सड़े से गुलाब हो गए।

मिले क्या थे "जय" से, तुम संगम किनारे,,,
भाव खाते हो जैसे, इलाहाबाद हो गए।



 
3 महीने पहले
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Prasoon Saxena

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