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दिल पर है कई ग़मों के बोझ

Jamshed Kgn

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उल्फ़त का अपनी बस यही अंजाम है
        
                                                    
                            
रुसवाई हम दीवानों का इनाम है

मिले हैं हज़ारों दिल वहाँ मगर
यहाँ जाने कितने आशिक़ नाकाम हैं

हमारे कत्ल का अब इरादा कर लीजिए
हमारे सर पे मोहब्बत का इल्ज़ाम है

यू तो मेरे है कई यार ग़मख़्वार
उन्हीं में से कुछ अपने बनाम है

हो गया मुझसे मैख़ाने का नुकसान
चढ़ा है जो किसी के आँखों का ज़ाम है

अपना है बस सामान दरवेश
हमारा काम हुआ तमाम है

दिल पर है कई ग़मों के बोझ
ये जो मोहब्बत है यूही बदनाम है

याद आई तेरी तो याद आया मुझे
ऐसे तो जमशेद तेरा जीना हराम है
-नूर हसन 
एक दिन पहले
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