विज्ञापन

जीवन-सूत्र

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवन में कौन मिले, ये समय की रचना है,
        
                                                    
                            
किससे मिलो तुम, ये दिल की इच्छा है॥
पर किसके दिल में बसो, ये तय व्यवहार करे,
मीठे बोल, सच्चे कर्म, रिश्तों को अमर करे॥

दो ही जग में असफल हैं, सुन लो ये बात,
एक वो सोचते रहें, पर न बढ़े एक पग,
दूजा वो करता जाए, बिना सोचे परिणाम,
बिना विवेक का कर्म, बिना कर्म का ज्ञान॥

झूठ का अंत तय है, ये विधि का विधान,
पर दुख तब होता है, जब निगले कई सच महान॥
अपना कहकर भी जो, औरों संग नीचा दिखाए,
समझो वो रिश्ता झूठा, दूरी बनाना भाए॥

ढोंग से जुड़ने वाला, कभी सुखी न देखे,
ऐसे लोगों से बचकर, मन को शांत रखे॥
जब हर कदम पर कोई, पुरानी यादें कुरेदे,
समझो परीक्षा है ये, हौसले और बढ़े॥

अपना परिचय खुद दो, तो संघर्ष कहलाए,
कोई और दे परिचय, तो उन्नति दर्शाए॥
किसी परिचय के मोहताज न हो, ये लोकप्रियता है,
अपने कर्मों से जग में, अपनी पहचान बना लेना॥

समय से मिलन होगा, दिल से जुड़ाव होगा,
व्यवहार से अमरत्व, यही जीवन का भाव होगा॥
- जगदीश प्रसाद शर्मा
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12618 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile