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हाथ में जीवन

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ग्रह देखे भविष्य, जब हाथ नहीं तेरे,
        
                                                    
                            
तारे लिखें लेखा, जब साथ नहीं तेरे।

जब तक सौंपा जीवन, दूसरों के हाथ में,
तब तक घूमेगा मन, ग्रह-नक्षत्रों के साथ में।

जिस दिन थामा जीवन, अपने ही हाथ में,
उस दिन छूटा बंधन, नक्षत्रों की बात में।

आध्यात्म के पथ पर, कदम जो धरेगा,
ग्रहों का बंधन खुद-ब-खुद झरेगा।

योग से जुड़ा तो बीस प्रतिशत तेरा,
मन को जोड़ा तो पचास प्रतिशत तेरा।

मन, कर्म, विचार जब एक हो जाएँगे,
सौ प्रतिशत भविष्य तेरे गीत गाएँगे।

कोई भविष्यवक्ता फिर क्या बोलेगा,
जब तू खुद ही अपना भाग्य तोलेगा।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
एक महीने पहले
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