विज्ञापन

मुक्तक कापड़ी के

Jagdish chandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारी याद जब आती है, आँखें नम हो जाती हैं,
        
                                                    
                            
बीती हुई अधूरी बातें भी जीवंत हो जाती हैं।
सोचा था भूल जाऊँगा तुम्हें इस जिंदगी में,
मगर कुछ यादें ऐसी हैं, जो उम्रभर सताती हैं।

रूठ जाओ तुम, मुझ को मनाना आता है,
पकवान बना दो तुम, मुझे खाना आता है।
तुम्हारी हर शरारत को प्रेम समझूँगा,
अभी बच्चा हूँ खुद को, समझाना आता है।

तुम पास हो तो जिंदगी आसान लगती है,
तुम्हारी हर हँसी मुझे मुस्कान लगती है।
तुमसे दूर जाकर प्रेम समझ आया,
बिन तुम्हारे हर खुशी सुनसान लगती है।

कभी सपनों में बातें, यार करो हमसे,
एक-दो-तीन नहीं, आँखें चार करो हमसे।
मंज़ूर नहीं हमको तन्हा-तन्हा रह जाना,
हम अधूरे हैं, मुकम्मल प्यार करो हमसे।
-जगदीश चन्द्र कापड़ी
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

1 कविता

View Profile

Deepak Sharma

24 कविताएं

View Profile