सावन है चल रहा पावन महीना यह, देखि कै हरीतिमा को फूले न समाइए।
धानन की लहराती फसल निहारि करि, नैनन की ज्योति में सुधार भी तो लाइए।
भोर ही में जागि कर जल से नहाय धोय, लोटिया में नीर लै शिवालय में जाइए।
शिवलिंग का जलाभिषेक करि विधिवत, हाथ जोरि जोर जोर शंभु गुन गाइए।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'