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मोरन की धुनि कान परै सजनी

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मोरन की धुनि कान परै सजनी सुनिकै मन आस बँधावै।
        
                                                    
                            
राह तकै अपने पिय की सिगरे दुख कौ वह दूरि भगावै।
नाम पुकारत है मुख ते नहिं, भींचि हिया बिच चित्र लगावै।
शत्रु समान लगै यहु माह कहै प्रभु जी नहिं सावन आवै।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक दिन पहले
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