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मातु कृपा

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसन पंकज श्वेत सुशोभित पुस्तक हस्त लिए गुणधामी।
        
                                                    
                            
वस्त्र सुशोभित हैं तन श्वेत मरालहु श्वेत सदा विचरामी।
ज्ञान व शब्दन की निधि पास बने सबही तुमरे अनुगामी।
मातु कृपा करिए मुझ पै पद पंकज माहि नमामि नमामी।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
3 महीने पहले
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