विज्ञापन

संकट की गति कंटक सी जिमि जीवन फूल सुहाय रहे।

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फूल बगीचन बीच खिले यह बात हमैं बतलाय रहे।
        
                                                    
                            
रंग बिरंग छटा छिटकी सब देखि मनै मुसुकाय रहे।
कंटक माहिं निखार हुआ तबहीं सबके मन भाय रहे।
संकट की गति कंटक सी जिमि जीवन फूल सुहाय रहे।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile