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धोती थी कमर पर और काँधे पे जनेऊ

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धोती थी कमर पर और काँधे पे जनेऊ, मूँछों पर ताव देके कदम बढ़ाते थे।
        
                                                    
                            
माता जगरानी सीताराम पिता जिनके थे, नाम है आजाद यही सबको बताते थे।
जिनकी सुयश का है साक्षी पार्क अलफ्रेड, जहाँ प्राण हीन तन छूते घबराते थे।
उनकी चरण रज को प्रणाम कोटि कोटि, जिनकी माउजर से गोरे थरथराते थे।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
2 महीने पहले
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