विज्ञापन

अंजुलि

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अंजुलि में जल को भरि कै सब पीवत हैं जब कंठ सुखाहीं।
        
                                                    
                            
अर्घ्य दियौ तबहूँ यहि से सब देवन के ढिँग में पहुँचाही।
अर्पण हेतु भरौ कुसुमानि यही महँ द्यो फिरि देव चढ़ाही।
दान करौ जब अन्न व भोजन होउ प्रसन्न मनहिं मन माहीं।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

505 कविताएं

View Profile

isarahk

2 कविताएं

View Profile