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ये अब शायद ही कभी उतरेगा।

Hitendra Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अहा ये कैसा युद्ध छिड़ गया,
        
                                                    
                            
हर तरफ बढ़ गई दानवता,
देवत्व सबमे किधर गया,
कौन कैसे लड़ेगा,
कौन कैसे जीतेगा,
और कौन कैसे हारेगा,
ये ही सवाल हर किसी को यहां
हतप्रभ कर गया,
में मेरा जब स्वयं दुश्मन बन बैठा,
तो विरद का कोई क्या करेगा,
ये समर भूमि के गीतों को मत गूंजने देना,
क्योंकि मातम ही यहां ऐसा फैला कि,
ये अब शायद ही कभी उतरेगा।
2 सप्ताह पहले
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