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क्योंकि बिना अस्मिता के यहां जीना भी क्या जीना।

Hitendra Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज में क्या ले जा रहा हु अपने साथ,
        
                                                    
                            
बिना अस्मिता मेरी यहां कोई पहचान नहीं,
में बिना अस्मिता के कैसे खुद को कही रख पाऊंगा,
क्योंकि इसके अलावा इसका कोई अन्य विकल्प नहीं,
खुद को बनाने में युग बीत जाया करते है,
तुम कहते हो इसे में यू ही भूल जाऊ,
में नहीं बन सकता तुम सबके जैसा,
क्योंकि बिना अस्मिता के यहां जीना भी क्या जीना।
4 दिन पहले
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