विज्ञापन

क्योंकि हर तरफ फैल चुका है बाजार।

Hitendra Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम लौटा क्यों नहीं देते
        
                                                    
                            
मेरे गुजरे हुए दिन,
क्या तुम इन सबका भार ढो सकोगे
इसमें आशा है, निराशा है,
किसी पथ पदिक की भारी अभिलाषा है
इसमें सबसे बड़ा दिन है वार
जिसे नहीं मनाया था, मैने हर त्यौहार,
निस्वन अब नहीं रही नीडो में
क्योंकि हर तरफ फैल चुका है बाजार।
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

rashmi gupta

191 कविताएं

View Profile

Deepti Tripathi

119 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile